शुक्रवार, 9 अगस्त 2019

मोदी सरकार की दे दनादन...


मोदी सरकार दनादन निर्णय ले रहीं है. यह स्टाईल लोगों को पसंद आ रहां है. उसी कारण लोगों ने उन्हें दोबारा चुनकर दिया है. शायद बीजेपी इम्लिमेंटेशन और रिझल्ट पर ज्यादा माथापच्ची नहीं करती है. तभी कुछ काम होता दिख भी रहां है. कम से कम लकवाग्रस्त कांग्रेस से तो यह स्टँड लोगों को अच्छा हीं लग रहां है. यह धक्का देनेवाली सरकार है.
इस के पहले कि विपक्ष संभल पाता अभी अभी जम्मू-कश्मीर से 370 हटाने का निर्णय झटके में हो गयां. अब अच्छा हुआ या बुरा इस पर सालों-साल डीबेट होती रहेगी; मोदी जी ने काम कर दिया है.
अभी भी जीएसटी, नोटबंदी के झटके से लोग उभरे नहीं है. मोदी जी ने एक दिन घोषणा कर दी.बाकी काम बँक और लोगोंपर छोड़कर वे आगे बढ गये.
ऐसे हीं एक दिन जीएसटी लागू हो गया. कुछ दिन व्यापारी और लोग पागल हो गये. अभी भी बदलाव हो रहे है. मोदी जी कों पता है, व्यापारी,प्रशासन और लोग आपस में देख लेंगे. नोटबंदी के बाद भी लोग शॉक में थे. हर निर्णय को ऐतिहासिक बताने कां इस सरकार कां तरीका है. तो किसी निर्णय से लोगों कि अपेक्षायें बढ जाती है. कुछ अच्छा होने वाला है, ऐसी आम धारणा बन जाती है. नोटबंदी से काला धन बाहर आयेगा, यह खयाल हीं कितना सुहाना है? तो कई लोगों ने घंटो धूँप में बँको के बाहर लाईन में लगकर मरना पसंद किया; लेकिन सरकार के निर्णय का स्वागत किया.
जीएसटी के पहले एक्स्पर्ट्स को टीव्ही पर बिठाकर उसके फायदे गिनवाये गये.टॅक्स कम होगा,चीजे कैसी सस्ती होगी,यह ख्वाब लोगों के मन में जगाया गया. लोग खुश हुये कि अब महंगाई कम होगी; लेकिन हमारा व्यापारी कभी घाटे में नही होता. टॅक्स को उन्होने कुबूल किया और सारे चीजों के दाम 25 से 40 परसेंट बढ़ा दिये. मोदी सरकार आगे बढ गयी है और लोग समझ नहीं पा रहें है कि चीजें कब सस्ती होगी. सामान्य आदमी को इस बात का आश्चर्य होता है कि मैं तो महंगाई के चटके झेल कहां हूँ, लेकिन महंगाई है हीं नहीं यह दर्शाने वाले आँकडे कौन बनाता है? यह आँकडे महंगाई को साफ नकार रहें है.
कश्मीर में शांती महसूस भी होनी चाहिए.
कलम 370 हट गया. इस के लिए बड़ी ईच्छाशक्ती चाहिये. हिंमत का काम है. अब कश्मिरीयों को जोड के रखने काम असली काम बाकी है. कांग्रेस के राज में क्या निर्णय होगा इसका अंदेसा लोगों को ही नहीं पाकिस्तान को भी हो जाता था. अब तो किसी को कुछ पता हीं नहीं चलता. मोदी जी क्या करेंगे यह ना लोगों को ना विपक्ष को पता होता है. बाद में सब रोते रहते है कि हमें विश्वास में नहीं लिया. मोदी जी सब को सिखा रहे कि विश्वास में लिया तो कोई बडा निर्णय नहीं हो पायेगा. तो इधर कांग्रेस परेशान रहती है और उधर पाकिस्तान.
अब कांग्रेस टेक्निकल की चक्की पीसकर कुछ निकालने की कोशिश कर रहीं है. उससे कोई फायदा नहीं होगा. उधर कश्मीर में पहलें ही सारे नेताओ तों अंदर कर दिया गया है.बाकी लोग घरों में कैद है. अभी विरोध होगा भी तों नहीं दिख रहां है. मोदी जी का अपना स्टाईल है- आगे जो होगा उसे देख लेंगे. लोगों को भा रहां है. इस बात में कोई दम नहीं है कि यह वोट बँक पॉलिटिक्स है. भारत में शायद हीं कोई काम वोट बँक पॉलिटिक्स को नजरअंदाज कर के किया जाता है. अगर 370 हटाने से हिंदू खुश होते है तो यह कलम अबतक 70 साल रखना मुस्लिमों को खुश रखने के लिए था, ऐसा अर्थ निकलता है. तो कम से कम कांग्रेस को मूँह नहीं बचा है कि वे इस सरकार पर वोट बँक पॉलिटिक्स का आरोप लगायें.
एक बात है- मोदी सरकार पर जब भी कोई संकट आता है तो वे रास्ता निकाल लेते है. अभी इकानामी के हालात खस्ता होने कि चर्चा चल हीं रहीं थी की मोदी जी ने 370 निकाल दिया. अब इकॉनामी 370 से बढकर थोडे ही है? जवाब धीमे आवाज में दिजिये; नहीं तो देशद्रोही करार दिये जावोगे.
अब असली सवाल पर आतें है.
समूह का मन होता है? पता नहीं; लेकिन ऐसा होता होगा तो कभी इस देश ने व्यापारीयों कां युग आने कि कामना जरूर की होगी.बीजेपी के सत्ता में आते हीं वह ईच्छा शायद फलीभूत हो गयी है. भारत के आर्थिक हालात कुछ भी हो, आखिरकार व्यापारीयों कों यह देश मनमुताबिक चलाने कां सौभाग्य प्राप्त हुआ है.
जब से मोदी जी प्रधानमंत्री बनें है, देश के व्यापारीयों के लिए सुवर्णयुग कां अवतरण हुआ है.वैसे भाजपा पहले से हीं व्यापारीयों की पार्टी कहलाती जाती रहीं है. आलोचकों कां यह नजरीया बदले इसके लिए पार्टी कोशिश भी करती रहती है.
देश के तरक्की के आँकडो में तो लगातार गिरावट आने कि बांत हो रहीं है, लेकिन ना सरकार पर कोई असर पडा है और ना हीं उद्योजकों को कोई फर्क पड़ता है. ऑटो,एफएमसीजी और लगभग सारे क्षेत्रों के आँकडे गिरावट दिखा रहें है. एक्स्पोर्ट के हालात खराब है. इम्पोर्ट हीं इम्पोर्ट है. जब के मोदी जी के कॅबिनेट में ज्यादातर नेता मूलत: व्यापारी हीं है. उन्हे लगातार दस साल देश चलाने का मौका मिल रहां है. लेकिन इकॉनामी पटरी पर आती दिख नहीं रहीं है.
कहां गया था कि जीएसटी,नोटबंदी से इकानामी दौड़ेगी. दिख तो नहीं रहां. बस सबके पास अपने समर्थन में आँकडे जरूर है; लेकिन उससे लोगों कों केवल भ्रमित किया जा सकता है. उस पर विश्लेषण करना एक्स्पर्ट्स काम है. अभी के सरकारी आँकडे तो गिरावट ही दिखा रहें हैं.
इकॉनामी कि समझ पाँच टका लोगों कों होगी. बाकी लोग इस विषय में लगभग अनपढ़ है. तो कांग्रेस अलग आँकडे दिखाती है तब लोगो कों लगता है कि देश डूब रहां है. बीजेपी कां सवाल हीं नहीं है. वह सत्ता में है तो कहीं कुछ गलत होनें कां सवाल हीं नहीं है. उनके पास जो आँकडे है उससे तो ऐसा लगता है कि जल्द हीं लोगों के घर पर सोने के स्लॅब होंगे! यह आँकडो का खेल सत्ता और विपक्ष में सालों-साल चलता रहता हैं. उसमे उलझना और मूर्ख बनने कि जिम्मेदारी आम आदमी पर है. यह भूमिका लोग इमानदारी से निभाते आ रहें है.
अब आगे क्या होगा? बहुत से सवाल अधर में लटके है. 370 से बीजेपी समर्थकों को भावनिक टॉनिक मिला है. यह मुद्दा मोदी जी की सत्ता रहते गुंजता रहेगा.
चर्चा हो रहीं है कि अब राम मंदिर पर कुछ होगा. हो जाये तो अच्छा है. देश में अनगिनत समस्यायें है. बेरोजगारी है. सरकारी बाबूओका करप्शन जैसे थे है. एनपीए फूल रहां है और सबसे ख़तरनाक बांत न्याय खतम हो गया है. छोटे-बड़े कोर्ट में करोड़ों केसेस पेंडिंग है. वहां ज्यादातर समझौते चोरों के हित में हो रहें है. भले ही कश्मीर ने बीजेपी को केंद्र में सत्ता दिलाई हो,लेकिन कब तक कश्मीर पर हीं फोकस रहेगा? देश की समस्याओं पर भी सरकार को ध्यान देना होगा. कब तक लोग भावनिक मुद्दों पर झुलते रहेंगे?

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